जिंदगी में डिग्री का महत्व: Value of Degree in Life

डिग्री का महत्व

मुख्य लेख: जिंदगी में डिग्री का महत्व













डिग्री अंग्रेजी अर्थात english का एक शब्द है, यह उच्च शिक्षा विभाग से अध्ययन पश्चात प्राप्त की जाने वाली एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उच्च शिक्षा विभाग से सम्बंधित हर क्षेत्र में योग्य विद्यार्थी को डिग्री प्रदान की जाती है। इनमें प्रमुख क्षेत्र हैं:

1. चिकित्सा क्षेत्र।

2. इंजीनियरिंग क्षेत्र। 

3. कृषि क्षेत्र।

4. अन्य क्षत्रों में प्रदान की जाने वाली डिग्रियाँ।

डिग्री की वैल्यू को हम निम्न. परिपेक्ष्य में समझेंगे:

1. वर्तमान के परिपेक्ष्य में

2. भूतकाल के परिपेक्ष्य में

3. भविष्य के परिपेक्ष्य में 

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल/पोस्ट किसी व्यक्ति, संगठन या या वर्ग विशेष को लक्ष्य नहीं करती, न ही किसी की भावना को ठेस  पहुँचाने के उद्देश्य से लिखी गई है। यह सामान्य जानकारी पर आधारित लेख है।】

भूतकाल में

यदि हम 15 वीं, 16 वीं या 17 वीं सदी में देखें तो वहाँ शिक्षा के क्षेत्र में विशेष उन्नति नहीं हुई थी, परन्तु शिक्षा का महत्व वही था जो आज है।


"Modern Universities were established during British rule in the 19th century. A series of measures continuing throughout the early half of the 20th century ultimately laid the foundation of education in the Republic of India, Pakistan and much of the Indian subcontinent." अर्थात्-

आधुनिक विश्वविद्यालय 19 वीं शताब्दी में ब्रिटिश शासन के दौरान स्थापित किए गए थे।  20 वीं शताब्दी के आरंभिक मध्य दौर में जारी एक श्रृंखला ने अंततः भारतीय गणराज्य, पाकिस्तान और अधिकांश भारतीय उपमहाद्वीप में शिक्षा की नींव रखी।

डिग्री की समझ: 17 वीं और 18 वीं सदी में डिग्री को एक विशेष वर्ग के द्वारा ज्यादा महत्व दिया गया। मुख्य और बड़े शहरों तक ही डिग्री सीमित रही, छोटे शहर और गाँवों के लिए यह या तो ज्यादा ध्यान न देने योग्य या एक कठिन पहेली बनी रही। इस दौर में डिग्री और डिग्रीधारियों को बहुत ही सम्मान दिया जाता था। यह श्रेष्ठ श्रेणी में शामिल थी।

वर्तमान में

कुछ दशकों से बेरोजगारी अपने चरम पर है। इसके कई कारण हैं, जिनमें पहला जनसंख्या का अनवरत रूप से बढ़ना है। चूँकि हम डिग्री की बात कर रहे हैं अतः बेरोजगारी से तात्पर्य डिग्रीधारी बेरोजगार वर्ग से है। 

डिग्री की समझ: डिग्री एक अतिमहत्वपूर्ण प्रमाण पत्र है जो यह तय करती है कि हमारी भविष्य क्या होगी, कैसी होगी? अगर हमारे पास डिग्री है तो भविष्य में नौकरी मिलने की संभवना बनी रहेगी, और हम डिग्री भी इसलिए पूरी करते हैं ताकि हमें नौकरी मिले और डिग्री की सार्थकता सिद्ध हो जाये। डिग्री पूरी करने के पश्चात भी नौकरी न मिलना निराशा का कारण बनती है। यह वर्तमान में डिग्री के प्रति आम धारणा जो माता-पिता और बच्चों सभी पर समान रूप से लागू होती है। 

डिग्रीधारियों की संख्या इतनी अधिक है कि डिग्री या डिग्रीधारी को नहीं अपितु डिग्री पश्चात नौकरी करने वाले को सम्मान दिया जाता है। यही कारण है कि आज की वर्तमान स्थिति में Ph.D. डिग्रीधारकों को भी क्लर्क की नौकरी करते हुये देखा जा सकता है, यह अवश्य ही संभावी है। डिग्री की वास्तविक वैल्यू गिर चुकी है।

भविष्य में

भविष्य में बेरोजगारी की समस्या विकट ही रहेगी। इसके विकट होने की संभावना और भी ज्यादा रहेगी। वर्तमान में उच्च शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था छोटे शहरों और कस्बों तक पहुँच चुकी है। शिक्षा व्यस्था इतनी सरल हो चुकी है कि डिग्री प्राप्त करना आम बात हो चुकी है। 

भविष्य में डिग्री की समझ: भविष्य का सीधा संबंध वर्तमान से है, भविष्य में डिग्री और डिग्रीधारियों की संख्या इतनी अधिक हो जायेगी की इसके धारक इसे कागज का एक टुकड़ा ही समझेंगे जबतक की इससे उन्हें सरकारी नौकरी जैसी कोई प्रत्यक्ष लाभ न मिले। 

यहाँ बात सिर्फ सरकारी नौकरी की नहीं है, क्योंकि नौकरी तो नौकरी ही होती है, चाहे वह निजी क्षेत्र की हो या सार्वजनिक या सरकारी।

डिग्री की सही समझ क्या है या क्या होनी चाहिए?

इसे हम निम्न. बिंदुओं के आधार पर वर्तमान और भविष्य के संदर्भ में समझेंगे:

1. आत्म विश्वास
2. अनवरत सीखने की शृंखला
3. विकसित दक्षता।

आत्म विश्वास

डिग्री को इस तरह समझें कि यह पैरों की जंजीर न बनकर जिंदगी को खुलकर कर जीने की कोई राह दिखा दे। इसलिये जरूरी है कि उसी क्षेत्र का चुनाव करना चाहिए जिसे हम अच्छी तरह से समझना चाहते हैं या उस क्षेत्र में इन्वॉल्व होना चाहते हैं। आत्म विश्वास हो तो किसी भी फील्ड में सफलता पाना एक बुरे सपने में कुछ तकलीफों को झेलने और सुबह उठकर सूरज की नई किरण देखने के समान ही सुखद अनुभव देती है।

अनवरत सीखने की शृंखला

किसी भी क्षेत्र में डिग्री प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया एक Step by Step  Procedure का अनुसरण करती है। परन्तु प्रत्येक स्तर में ज्यादा से ज्यादा अंक प्राप्त करना ही वर्तमान शिक्षा पद्धति का हिस्सा बन चुकी है। जरूरी है कि चीजों को सैद्धान्तिक तौर पर ज्यादा महत्व न देकर प्रायौगिक तौर पर महत्व दिया जाए, क्योंकि Life में यही काम आते हैं; सिद्धान्त तो दिमाग के किसी कोने में जीवनभर Unused ही पड़ी रहती हैं।

विकसित दक्षता

यह आम धारणा है कि अगर किसी ने डिग्री हासिल की है तो उस व्यक्ति को अपने फील्ड से सम्बंधित सभी जानकारी होनी चाहिए। 

अतः वही डिग्री Life को Value दे सकती है जिसे प्राप्त करने हेतु इसलिए चयन किया गया हो ताकि हम किसी भी अवस्था में अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ रख पाएँ।

निष्कर्ष

डिग्री प्राप्त करना अति महत्वपूर्ण और आवश्यक है। डिग्री प्रोग्राम के शुरुआत और उसकी प्राप्ति तक एक लम्बी समय-अवधि रहती है। अतः Degree Program के दौरान Skill Development निःसंदेह आवश्यक है। डिग्री को अपनी पहचान के रूप में देखनी चाहिए, Print किये गए कागज के टुकड़े से कहीं ज्यादा इसकी महत्व है जो हमारे पैरों में को जंजीर न डाल दे।
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