धान के लाल पत्ती (खैरा रोग) का ऐसे करें उपचार

धान का खैरा रोग एक ऐसा रोग है जो धान की फसल के बढ़वार और उत्पादन पर प्रत्यक्ष रूप से प्रभाव डालता है। 

'धान का कटोरा' कहे जाने वाले राज्य, छत्तीसगढ़ में इन दिनों चारों ओर धान की लहलहाती फसल देखी जा सकती है।

इसी के साथ ऊपरी भागों अर्थात चंवरा भूमी और उथली जमीन में बोई गई धान की फसल में इससे सम्बंधित बहुत ही महत्वपूर्ण फसल बीमारी की समस्या देखी जा रही है, यह समस्या है धान के खैरा रोग की।

रोग की वजह से धान की पत्तियाँ लाल-खैरा रंग की हो जाती हैं।

क्या है धान का खैरा रोग?

धान का खैरा रोग सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी से होने वाली रोग है। यह मृदा में जिंक अर्थात जस्ते की कमी से होने वाली रोग है।

क्या है इसका उपचार?

इसके उपचार के लिए रोपाई से पहले 25 किलो ग्राम जिंक सल्फेट प्रति हेक्टेयर की दर से मृदा में मिलायें।

अगर पूर्व में यह उपचार न किया गया हो तो रोग के लक्षण दिखने पर 5 किलो ग्राम जिंक सल्फेट को 500 - 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर खड़ी फसल पर छिड़काव करें।

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