मेरी जबलपुर यात्रा: छत्तीसगढ़ से जबलपुर (भेड़ाघाट दर्शन)

परिचय

(यात्रा दिनाँक- 22-12-2018)
भेड़ाघाट जो की मां नर्मदा के पवित्र क्षेत्र में आता है, एक विश्वप्रसिद्ध दर्शनीय स्थल है। नर्मदा नदी अपने उद्गम स्थल अमरकंटक जो कि पहले आम्रकूट और अमरकोट नाम से जाना जाता है, से निकल कर जब जबलपुर पहुंचती है, तब संगमरमर की चादर से गुजरते हुए इसका महत्व एकदम से बढ़ जाता है।

महत्व एवं दर्शनीय स्थल

भेड़ाघाट सफेद और कथियाई रंग के संगमरमर के चट्टानों वाला प्रसिद्ध स्थल है, जहां पर देश के कोने-कोने से और यहां तक कि विदेशों से भी पर्यटकों का तांता लगा रहता है। भेड़ाघाट में नौकाविहार का आनंद लेते समय मन प्रफुल्लित हो जाता है। नौका जब संगमरमर के दो विशाल पहाड़ नुमा उभारों के संकरे दरार के बीच से होकर गुजरता है तो नजारा देखने लायक होता है। नौंकाविहार के अलावा सायं काल में होने वाले लेजर शो भी पर्यटकों के लिए अचंभे का सबब बन जाता है। यादगार के तौर पर यहां पर बहुत से संगमरमर के पत्थरों से निर्मित सामग्रियां क्रय हेतु उपलब्ध रहती हैं, यहां कई सेल्फी प्वाइंट भी हैं।

नर्मदा मैयां की सबसे खास बात ये है कि जब भी आप इसमें डुबकी लगाएंगे अथवा इसके तट पर से कोई भी पत्थर उठाएंगे वह शिवलिंग निकलेगा।

भेड़ाघाट के अलावा धुआंधार जल प्रपात भी बेहद रमणीय और भ्रमण करने वाला स्थल है। धुआंधार जल प्रपात भेड़ाघाट से केवल 5 मिनट की दूरी पर स्थित है। धुआंधार जल प्रपात से नीचे गिरता जल धुएं की भांति ऊपर उठते हुए दूर से ही दृश्यमान हो जाता है।

भेड़ाघाट से धुआंधार जाने के विपरीत दिशा में 5 मिनट की दूरी पर चौंसठ योगिनी का प्राचीन मंदिर है, जिसके मध्य में गौरीशंकर स्थित हैं। मंदिर के बाहर ही एक गुप्त रास्ता है जो कि अब बंद कर दिया गया है। इस रास्ते का उपयोग रानी दुर्गावती किया करती थीं।

भेड़ाघाट से लगभग 12 से 15 किलोमीटर की दूरी पर मां त्रिपुर सुन्दरी देवी का प्राचीन मंदिर भी स्थित है जो कि मुख्य मार्ग से 5 किलोमीटर की दूरी पर है।

छत्तीसगढ़ से भेड़ाघाट हेतु पहुँच मार्ग

छत्तीसगढ़ से भेड़ाघाट जाने के लिए रेल मार्ग ही उपयुक्त है। रायगढ़ से सबसे पहले ट्रेन में बैठकर बिलासपुर और फिर बिलासपुर से कटनी फिर जबलपुर पहुंच सकते हैं।

अगर आप अम्बिकापुर क्षेत्र के पास हैं तब यहां से सुबह 6 बजे के ट्रेन में बैठकर 3 बजे जबलपुर पहुंच सकते हैं।

अगर आप भिलाई या दुर्ग के आस पास रहते हैं तब अमरकंटक एक्सप्रेस से जबलपुर पहुंच सकते हैं।

एक बार जबलपुर पहुंच जाने के बाद आप जबलपुर से भेड़ाघाट ट्रेन से भी जा सकते हैं अथवा मेट्रो बस या ऑटो रिक्सा से।

सबसे उपयुक्त मेट्रो बस है, यह सीधे धुआंधार के बाहर उतरता है। मेट्रो बस सुबह 8 बजे, दोपहर 2 बजे और आखिरी बस शाम को मिल जाएगा। वापसी के लिए भी मेट्रो बस मिल जाएगा लेकिन उपयुक्त यही होगा की आप पहले से ही मेट्रो बस का टाइम उसके एजेंट से पूछ लें, जो को रेलवे स्टेशन के बाहर बस के पास और धुआंधार के पास भी कुर्सी में बैठे मिल जाएंगे।

भेड़ाघाट, धुआंधार, चौंसठ योगिनी मंदिर और त्रिपुरा सुंदरी मंदिर जो की आस पास ही स्थित हैं, को छोड़ दिया जाए तो जबलपुर में बहुत सारे घूमने के लिए क्षेत्र हैं।


रुकने की व्यवस्था

जबलपुर में रुकने के लिए जबलपुर रेलवे स्टेशन के बाहर ही 500 मीटर की दूरी पर राजा गोकुलदास धर्मशाला स्थित है जिसमें आप रुक सकते हैं, रात बिता सकते हैं। राजा गोकुलदास धर्मशाला में दो समय खाने का भी व्यवस्था है जिसमें बहुत से व्यंजन होते हैं साथ ही इसकी कीमत 5 रुपए प्रति थाली है।

अगर आप भेड़ाघाट और धुआंधार आना चाहते हैं तब बसंत का मौसम ठीक रहेगा, क्योंकि गर्मी में यह क्षेत्र बहुत गर्म और ठंडी में बहुत ठंड होती है।

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