परिचय: ईब नदी

स्थानीय नाम- ईब नदी
इंग्लिश नाम- Ib River, Eb River.
लम्बाई- 89 किलो मीटर
देश- भारत
राज्य- छत्तीसगढ़
संभाग- सरगुजा
जिला- जशपुर
विकासखंड- फरसाबहार, बगीचा, कुनकुरी
ग्राम- कोतेबीरा
क्षेत्र- 261 वर्ग किलो मीटर औसतन (तटीय क्षेत्र)।

ईब नदी छत्तीसगढ़ राज्य के जशपुर जिले और उड़ीसा के सुंदरगढ़ एवं संबलपुर में बहने वाली एकमध्यम परन्तु बहुत ही महत्वपूर्ण नदी है। इस नदी की खासियत यह है कि अन्य बड़ी नदियों की तरह चौड़ी न होते हुए भी तेज प्रवाह वाली है। यह एक बरसाती अर्थात मौसमी नदी है। यह बरसात के दिनों में पूरी उफान में होती है। यह एक बहुत ही सुन्दर नदी और पर्यटक स्थल है। दो राज्यों में बहने की वजह से यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण नदी बन जाती है।

ईब नदी छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी व महत्वपूर्ण नदी अर्थात महानदी की सहायक नदी है, जो इस नदी की तुलना में ज्यादा लम्बी और चौड़ी है। जहाँ ईब नदी और महानदी  का संगम स्थल है उस जगह को हीराकुण्ड अथवा हीराकुद डैम के नाम से जाना जाता है, और जगह उड़ीसा राज्य के अंतर्गत आती है।

यह नदी बरसात के मौसम में भरी होती है। गर्मी के दिनों में यह लगभग सुख जाती है।

उत्पत्ति

इस नदी की उत्पत्ति जशपुर जिले के पठारी व पहाड़ी क्षेत्रों से हुई है। मुख्य रूप से यह क्षेत्र बगीचा में आती है। इन पठारी क्षेत्रों को यहाँ स्थानीय भाषा में पाट क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। इन क्षेत्रों में प्रतिवर्ष सामान्य से अधिक वर्षा होती है। इस तरह पाट क्षेत्र के बरसाती पानी के एक जगह जमा होने और पठार से नीचे की ओर बहने से इस नदी की उत्पत्ति हुई।

महत्व

इस क्षेत्र में इस नदी का योगदान और महत्व प्रत्येक क्षेत्र में है। प्राकृतिक महत्व के साथ ही धार्मिक, आर्थिक और सामाजिक महत्व भी है। इन्ही कारणों से ही इस क्षेत्र में इस नदी को पवित्र माना जाता है, और कई स्थलों में समयानुसार इसकी पूजा भी की जाती है। ऐसा माना जाता है कि यह अपने उपासकों की एक माता की तरह पालन पोषण करती है।

प्राकृतिक महत्व

यह नदी इस क्षेत्र को प्रकृति को दिया गया वरदान है। इसकी तटों पर वृक्षों की लम्बी लम्बी कतारें हैं, जो देखने में मनमोहक होते हैं। कई जगह विदेशी पक्षियों के समूह भी देखे जा सकते है। बरसात के बाद नदी के ऊपर आसमान में बने इंद्रधनुष मन मोह लेने के लिए काफी है।

आर्थिक महत्व

आर्थिक महत्व इस प्रकार है-

सोना- इस नदी के रेत के कणों के साथ सोने का अंश मिला होता है। स्थानीय लोग रेत के कणों से स्थानीय विधि का प्रयोग कर सोने के अंश को अलग कर लेते हैं।

इमारती रेत- आसपास के गाँव में पक्के मकान बनाने के लिए आवश्यक रेत की पूर्ति इसी नदी से होती है।

मछली उत्पादन- यहाँ जाल के प्रयोग से मछली मरना काफी अच्छा व्यवसाय है। कई जगह तो छोटे-छोटे बाँध बनाकर मछलियों का पालन भी किया जाता है।

सिंचाई का साधन- नदी के तटों पर बसे गाँव के कृषकों के लिए यह नदी सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराती है। यह प्रत्येक मौसम के लिए पर्याप्त होती है।

धार्मिक महत्व

इस नदी की पूजा अर्चना भी की जाती है। यह पवित्र है। कोतेबीरा में प्रतिवर्ष सावन के महीने में मेला लगता है। जो दोनों राज्यों के आकर्षण का केंद्र है।

सामाजिक महत्व

मुत्यु के पश्चात ग्रामवासियों के अंतिम निवास स्थान के रूप में यह जानी जाती है। इसके तटों पर कई जगह समशान पाये जाते हैं, जहाँ मृत्यु के बाद लोगों को दफनाया अथवा जलाया जाता है।

परियोजनाएँ

महत्वपूर्ण परियोजनाओं में बाँध निर्माण हैं। कई जगह बाँध बने हुए है। सड़क परिवहन परियोजना के अंतर्गत मुख्य मार्ग को ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने के लिए पूल बने हुए हैं। इनमें एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मार्ग 78 पर है और एक पूल राज्य राजमार्ग 54 पर है।

प्राकृतिक दोहन

प्रतिवर्ष हज़ारों टन रेत का खनन रेत माफियाओं के द्वारा किया जाता है। यह कालाबाजारी के अंतर्गत आता है क्योंकि खनन किये गए रेत का संग्रहण कर उसे अनुचित दामों पर बेचा जाता है।

-BY Harish Manik


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