घोर निराशा में क्या करें?

घोर निराशा में क्या करें या क्या करना चाहिए?

घोर निराशा एक ऐसी स्थिति है जो मनुष्य की जिंदगी में एक से लेकर कई बार आ सकती है। यह वह स्थिति होती है जब मनुष्य को लगता है कि, बस सबकुछ खत्म हो गया है। और उसकी जिंगगी से लगाव कम हो जाता है।

इसके कई वजह हो सकते हैं। इनमें किसी रिश्ते में असफलता, नौकरी में निराशा और भी कई छोटी या बड़ी वजह हो सकती है। परन्तु, इनमें से दो कारण जैसे- रिश्तों में असफलता और नौकरी में निराशा ही अधिकतर मुख्य होते हैं।

इन दशाओं में कई बार इंसान हताश होकर वापसी नहीं कर पाते।

परन्तु जीवन यहीं या वहीं समाप्त नहीं हो जाती, जिसे जीवन समाप्ति के अंतिम बिंदु मान लिया जाता है।

निराशा और हताशा की यह स्थिति प्रत्येक व्यक्ति के लिये अलग हो सकती है। इसे उस व्यक्ति को स्वयं समझने की जरूरत है जो अवसाद की इस स्थिति में पहुँच जाता है।

ऐसी भयानक स्थिति से उबरना और अपनी जिंदगी बचाना किसी महान काम से कम नहीं है। क्योंकि हमारी जिंदगी के साथ कई जिंदगियाँ जुड़ी होती है, जो हम पर निर्भर है।

घोर निराशा और हताशा की स्थिति में स्वयं को एकांत में कुछ समय दें, जहाँ संभव हो वहाँ से मदद लें, यह मानकर चलें कि कम संसाधन से ही अच्छी और सुकून की जिंदगी मिल सकती है। क्योंकि, ज्यादा संसाधनों के तबाह हो जाने और ज्यादा धन के खो जाने का डर इंसान को एक डर का पुतला बना देता है, जो सदैव डर की साया में जीता है।

अपनी दक्षताओं को मूर्त रूप दें, क्योंकि यही एक साधारण इंसान को सफल इंसान बना देती है।

-BY HARISH MANIK

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