लोरो घाटी जशपुर: LORO GHATI JASHPUR

लोरो घाटी जशपुर: LORO GHATI JASHPUR

लोरो घाटी एक प्राकृतिक स्थल है, प्राकृतिक सम्पदा से भरपूर है। यह अपने सौंदर्य के लिए आसपास के क्षेत्रों में प्रसिद्ध है। यहाँ घाटी से तात्पर्य दो पहाड़ों के नीचे वाली खाली जगह न होकर तीन मोड़दार चढ़ानों से है। लोरो घाटी जशपुर पाट का ही एक भाग है। यह दुलदुला से 15 किलोमीटर, पतराटोली से 9 किलोमीटर तथा कुनकुरी से 30 किलोमीटर दूर है।



क्यों है इतना महत्व?

प्राकृतिक सौंदर्य

लोरो घाटी का अन्य नाम फूलों की घाटी भी है। विभिन्न समाचार पत्रों में इसे फूलों की घाटी के नाम से सम्बोधित किया जाता है। रायगढ़ से जशपुर आने वाले और झारखण्ड से छत्तीसगढ़ आने वाले यात्री पर्यटक के रूप में लोरो घाटी के सौंदर्य का आनंद लेते हैं।

यहाँ कागज के फूल सर्वाधिक मात्रा में पाये जाते हैं। चारों ओर सघन वन हैं। रात्रि के समय यहाँ जंगली जानवर भी देखे जा सकते हैं।

व्यवसायिक महत्व

यह राष्ट्रीय राजमार्ग 78 में स्थित है। यह मार्ग छत्तीसगढ़ को सीधे झारखंड से जोड़ती है। अतः व्यवसायिक दृष्टिकोण से यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण मार्ग है। यह एक व्यस्त मार्ग है जो ट्रक और बसों से हमेशा व्यस्त रहती है।

चूँकि यह घाटी बहुत ही लम्बी पर्वत श्रृंखला से निकलती है, तथा कोई अन्य वैकल्पिक रास्ता न होने की वजह से दो राज्यों के व्यवसायिक गतिविधि को रफ्तार देने कार्य करती है।

धार्मिक महत्व


इमेज: लोरोघाटी मंदिर

यहाँ दूसरे मोड़ में सड़क के किनारे एक मंदिर है। यह मंदिर इस घाटी से आने-जाने वाले लोगों पर अपनी कृपा बनाये रखती है।

जलवायु

वर्षाकाल: इस घाटी में बारिश के मौसम में बारिश अन्य जगहों की तुलना में बहुत ही ज्यादा होती है।

सर्द ऋतु: यहाँ सर्दी के मौसम में कड़ाके की ठंड पड़ती है। यह अंदर तक कँपा देने के लिए पर्याप्त होती है। कई बार तो ठंड इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि पाला (frost) ही पड़ जाता है।

ग्रीष्म ऋतु: ग्रीष्म ऋतु यहाँ सामान्य होती है। अधिक गर्मी नहीं पड़ती है। यह सहन योग्य होती है। शाम का समय सुहाना हो जाता है।

खतरा और सुरक्षा

इस घाटी में तीन खतरनाक मोड़ हैं, जरा सी लापरवाही से एक बड़ा हादसा हो सकता है। अतः मोटरसाइकिल अथवा कार से ड्राईव करते समय इस बात का हमेशा ख्याल रखना चाहिए कि गाड़ी बीच में न रुक जाए। एक बार गाड़ी रुक जाने की दशा में यह पीछे चलती जाती है और सीधे गड्ढे में गिर जाती है। इसके अलावा यहाँ दो वाहनों के बीच टकराव की भी संभावना हमेशा बनी रहती है क्योंकि इस घाटी के मोड़ बहुत ही तेज और खतरनाक हैं।

अगर किसी कारणवश दुर्घटना हो जाये तो सिर्फ 11-15 किलोमीटर की दूरी पर ही जिला अस्पताल है जहाँ घायलों का इलाज किया जाता है।

कई बार बड़े वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने के पश्चात पूरे रोड़ में चक्का जाम हो जाता है। यह जाम कई घंटों या दिनों के बाद खुलती है।

देखरेख एवं विकास

लोरो घाटी के देखरेख एवं विकास का कार्य जिला प्रशासन को सौंपा गया है। यहाँ प्राकृतिक सौंदर्य के विकास के साथ-साथ सड़को के विकास का कार्य भी निरन्तर चलता रहता है।

घाटी का प्रभाव

आसपास के लोगों के द्वारा इस घाटी को पवित्र माना जाता है तथा इसे दैवीय शक्ति का स्रोत भी माना जाता है। इस घाटी का वर्षा पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जशपुर दो भागों में बँटा है, पहाड़ के ऊपर वाला भाग ऊपर घाट तथा पहाड़ से नीचे वाला भाग नीचा घाट कहलाता है। तथा अक्सर यह देखा जाता है कि लोरो घाटी में घने बादल पूरे जिले की तुलना में अधिक ही होती है।

लोरो घाटी के मोड़

लोरो घाटी में कुल छः
 मोड़ हैं:

पहली मोड़



यह मोड़ दुलदुला की ओर से आने वाले रास्ते से लगा हुआ है। यह मोड़ बाएँ तरफ मुड़ती है। यह मोड़ कम चढाऊ है।

दूसरी मोड़



दूसरी मोड़ दाहिने तरफ मुड़ती है। यह सीधी है, अर्थात अधिक चढ़ान युक्त है। यहाँ वाहन चलाते समय एकदम सतर्क होना चाहिए।

तीसरी मोड़



यह मोड़ बाईं ओर मुड़ती है। यह सीधे आपको जशपुर ले जाएगी। यह थोड़ी आसान है।

चौथी, पाँचवी व छठवीं मोड़








आप जब भी इस मोड़ से गुजरें तो यहाँ दूसरे मोड़ के किनारे ही बने टावर में चढ़कर चारों ओर प्राकृतिक सौन्दर्य का आनंद अवश्य ही लें। तथा यहाँ की सुनहरी यादों को सँजोने के लिए अपने कैमरे का उपयोग करें।

घाटी की अन्य खास और रोचक बातें

1. केशकाल घाटी के बाद यह छत्तीसगढ़ का एक बहुत ही खरतनाक घाटी है।
2. इस जगह को पर्यटन स्थल में परिवर्तित करने की पहल की जा चुकी है।
3. यहाँ King Cobra, जो नाग साँप की सबसे बड़ी प्रजाति है, पाई जाती है।

घाटी से गुजरने वाली गाड़ियों की सूची

1. बस।
2. ट्रक।
3. कार।
4. मोटर साईकिल।

इस पर्वत श्रृंखला से रेल की पटरी नहीं निकाली गई है। अतः सार्वजनिक बसें एवं खुद के वाहन ही यातायात के साधन होते हैं।


आसपास के शहर: दुलदुला, लोरो, जशपुर।


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