Five Stories (फाइव स्टोरीज): भाग 01

अध्याय 01:


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कैरी 13 साल का एक बहुत ही शांत स्वभाव का बुद्धिमान लड़का था। उसके माता-पीता बहुत ही गरीब थे। उनका घर एक घने जंगल के किनारे था जहाँ रात में आसपास जंगली जानवरों का आना जाना लगा रहता था। यहाँ से मुख्य गाँव 15 किलोमीटर की दूरी पर थी। कैरी इसी गाँव की सरकारी स्कूल में 7 वीं क्लास में पढ़ता था और रोजाना स्कूल तक जाने के लिए साइकिल का उपयोग करता था।

इस वक्त गाँव में बारिश का मौसम था। स्कूल की छुट्टी हो चुकी थी पर जोरों की बारिश होने की वजह से सभी बच्चे अपनी-अपनी क्लास में ही बैठे थे। वे बारिश के रुकने का इंतजार कर रहे थे। समय का सही उपयोग करने के लिए सभी बच्चे खेलने में व्यस्त थे। परन्तु कैरी कुछ परेशान नज़र आ रहा था। वह बड़ी बैचेनी से बारिश रुकने और घर जाने का इंतजार कर रहा था। और इसका कारण था डर, जंगल में रात के समय जंगली जानवरों का डर।

बारिश सिर्फ स्कूल में ही नहीं, जंगल में भी हो रही थी। कैरे के माता-पीता कैरी की राह देख रहे थे।

कुछ समय बाद बारिश रुकी। और बारिश के रुकते ही कैरी अपनी साइकिल पकड़ कर बड़ी तेजी से घर की ओर निकल पड़ा। चारों ओर पानी ही पानी थी। सड़क, नाले, गली सभी पानी से भरे हुये थे। इन सबकी परवाह किये बिना ही कैरी तेजी से चले जा रहा था।

गाँव से बाहर जंगल की ओर जाने वाली कच्ची रास्ते में एक पक्की पुलिया थी। यह पुलिया इतनी बड़ी थी की, इस घनघोर बारिश के बाद भी इसका एक हिस्सा सुखा था अर्थात पुल के दो बड़ी नालियों में से सिर्फ एक नाली से ही बरसात की जल एक ओर से होकर दूसरी ओर जा रही थी। अभी कैरी इस पुल से होकर गुजर ही रहा था कि उसके कानों में कुत्ते के एक बच्चे की कुँ-कुँ की आवाज सुनाई देने लगी। शाम हो चुकी थी और सबकुछ धुँधला सा नजर आ रहा था। कैरी को समझ में नहीं आ रहा था कि आवाज किधर से आ रही थी।

साइकिल रोक कर उसने चारों तरफ नज़र घुमाई पर उसे कहीं कुछ नज़र नही आई। गौर से सुनने पर उसे पता चला कि यह आवाज पुल के नीचे से आ रही थी। अब आवाज और बढ़ती जा रही थी। कैरी ने अपने स्कूल बैग और साइकिल को एक तरफ रखा और पुल के नीचे उतरने लगा।

पुल के नीचे जाने के लिये एक सीधी ढ़लान और कच्ची पगडंडी वाली रास्ता बनी थी, जो बारिश के कारण गीली हो गयी थी। कैरी बड़ी सावधानी से अपने पैरों को जमाते हुए आगे बढ़ने लगा। तीन-चार कदम नीचे उतरने के बाद अचानक फिसल कर वह नीचे ही गिर गया। उसके ड्रेस कीचड़ से सन चुके थे। अपने कुर्तों की सफाई करते हुए उसकी नजर अचानक एक छोटे से नन्हे कुत्ते के बच्चे पर गई। यह अमेरिकन एस्किमो नस्ल की एक लड़की पप्पी थी जिसने कैरी को देखते ही अपनी कुँ-कुँ की आवाज बढ़ा दी। काँपते हुये पप्पी के देखकर कैरी ने उसे अपने उठा लिया और कुछ सोंचते के बाद उस छोटी पप्पी के साथ घर की ओर चलने लगा।

घर पहुँचने पर शाम हो चुकी थी। कैरी की माँ जो घर के द्वार में खड़ी होकर कैरी का इंतजार कर रही थी, उसने कैरी के साथ उस पप्पी को देखते ही कैरी को डाँटना शुरू कर दिया। उसने कैरी को पप्पी को दूर छोड़कर आने की बात कही पर अचानक यह बात याद आई कि अब तो रात हो चुकी है। और उस रात के लिए  कैरी की माँ ने पप्पी को आँगन में रहने की हामी दी। कैरी ने उसे अपने हिस्से का खाना दिया। अब तक काफी रात हो चुकी थी। कैरी सोते-सोते उस पप्पी के लिए एक नाम सोंचने लगा। सोने से पहले उसने तय किया कि पप्पी घर में ही रहेगी चाहे माँ से लड़ना पड़े और कई दिन भूखों रहना पड़े। उसने उसका नाम टेड्डी रखा था। अगली सुबह जिस अप्रिय घटना की शंका कैरी को रात भर हो रही थी वैसा कुछ हुआ नहीं, अब यह बात तय थी कि टेड्डी कैरी के साथ ही रहने वाली थी।

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अध्याय 02

चार साल बीत चुके थे, कैरी 16 साल का हो चुका था। हर साल की तरह इस साल भी टेड्डी का जन्मदिन मनाया जा चुका था और यह टेडी की 4 थी बर्थडे थी।

गाँव में दीवाली का त्यौहार समाप्त हो चुका था। ठण्ड थोड़ी बढ़ चुकी थी। कैरी के घर उसके मामा के बेटे मेहमान आये थे, इनमें से एक का नाम मनु था जो लंबा और पतला था जो जबलपुर का रहने वाला था और उसे खून की कमी थी। दूसरा लंबा आउट हट्टा-कट्टा था जो पुलिस की ट्रेनिंग में था और रायपुर का निवासी था। दोनों की उम्र 19 - 20 वर्ष के आसपास थी।

गाँव में शाम से पहले तो रात हो जाती है। अभी शाम के 6 ही बजे थे लेकिन चारों तरफ घुप्प अँधेरा हो चुका था। कैरी, मनु और आकाश अलाव को घेर कर बैठे थे। यहाँ यह बता देना आवश्यक है कि तीनों भाइयों में रोमांच में जाने की सनक थी। आग सेंकते-सेंकते मनु ने कैरी से कहा कि भैया पीछे की पहाड़ी में चढ़ने का मन कर रहा है, और अगले एक घंटे तक यही चर्चा की विषय बनी रही। अंत में निर्णय हुआ कि सुबह 4 बजे तक पहाड़ की चोटी में सभी होंगे। आवश्यक सामग्री की पैकिंग हो चुकी थी। सभी सोते-सोते सुबह का इंतज़ार करने लगे।

जैसे ही सुबह के 4 बजे, ठीक उसी वक्त कैरी की आँख खुल गई। इस समय चारों ओर घना अंधेरा था। कैरी ने मनु और आकाश को उठाने का काम किया पर दोनों उठने से मना करने लगे और फिर सो गए। लेकिन कैरी के बार-बार उठाने से दोनों उठ गए। सभी ने सुबह का नित्यकर्म किया और चोटी पर जाने की तैयारी करने लगे। पम्मी को उठाना नहीं पड़ा, यूँ कहें कि उसे तो नींद ही नहीं पड़ी थी।

बिना आवाज किये चारों घर से 03:15 पर निकल गए। कुछ दूर श्मशान के पास पहुँचने पर उन्हें अहसास हुआ कि कोई उनका पीछा कर रहा है। चारों के शरीर डर से फूलने लगा। पीछे मुड़कर देखने की हिम्मत किसी की नहीं हुई। आवाज धीरे-धीरे तेज होती गयी। सभी डर से एक साथ चिपक कर चलने लगे। और जैसे ही उन्हें अहसास हुआ कि कोई एकदम ही उनके नजदीक पहुँच गया है तो पोम्मी ने डर के मारे जोर से एक चीख निकाली। तभी कैरी ने देखा कि यह तो टेड्डी थी जो उनके पीछे-पीछे चली आयी थी। अब सबके जान में जान आई।

3:30 पर सभी पहाड़ की सीमा में प्रवेश करने वाले थे, सभी रोमांचित थे। टेड्डी कैरी के समीप ही थी। कैरी सबकी अगुवाई कर रहा था। रात के समय कहीं चोटी का रास्ता न भटक जाएं इसके लिए कैरी स्मार्ट फ़ोन में गूगल मैप का सहारा ले रहा था। पहाड़ के नीचे से लेकर ऊपर तक पहुँचने में उन्हें कई डरावनी अहसास भी हुए। ठीक 4 बजे सभी पहाड़ की चोटी पर पहुँच गये। सभी एक चौड़े चट्टान में बैठ गए। टेड्डी ठण्ड से बचने के लिए कैरी से सट कर बैठी थी।

पम्मी को जोर से पेशाब लगी थी। वह पास की झाड़ियों के पास जाकर पेसाब करने लगा। पेसाब करते-करते उसे लगा कि झाड़ियों के पीछे कोई है, उसने पीछे जाकर देखा तो डर के मारे उसके हाथ पैर वहीं के वहीं जम गये। उसने जो देखा वह एक नर भेड़िया था जो इस समय एक मरे हुए जानवर को खाने में  व्यस्त था। वह बहुत ही भयानक था। यह नजारा देखकर पम्मी ने कैरी को पुकारने की कोशिश की पर उसके मुँह से आवाज ही नहीं निकली। तभी मनु ने जोर से आवाज निकाल कर पम्मी को बुलाया जिसे पम्मी के साथ उस नर भेड़िये ने भी सुन लिया। अब पम्मी उसके नज़र में आ गया। उसने जानवर के लाश से अपना ध्यान हटाकर पम्मी की ओर छलाँग लगा दी पर इससे पहले की वह पम्मी तक पहुँचता, कैरी ने उसे अपनी ओर खींच लिया। अबतक सभी ने यह भयानक मंजर देख लिया था। सभी डर और दहशत से पहाड़ी के नीचे की ओर भागने लगे। इस जल्दी बाजी में सबके रास्ते अलग हो गए। कैरी, पम्मी और टेड्डी एक तरह भागने लगे, वहीं मनु और आकाश भटक गए।

नर भेड़िये का पहला शिकार मनु बना। उसने पेड़ के तने के पीछे छिपे मनु पर हमला कर उसे जख्मी कर दिया। पर इससे पहले की वह मनु को जान से मार देता, टेड्डी ने अचानक भौंकते हुये नर भेड़िये पर झपट्टा मारा। घबराहट में खुद नर भेड़िया दूसरी ओर चला गया।

इधर आकाश एक पहाड़ी की दूसरी छोर के तलहट में स्थित तालाब के किनारे पहुँच चुका था। उसने चारों ओर नजर घुमाई और तालाब के किनारे लगे बरगद के बड़े से पेड़ पर चढ़ गया। वह एक बड़े से शाखे के सहारे आराम से बैठ गया। और डर के मारे नीचे की ओर दिखने लगा। कुछ देर बीत जाने के बाद आकाश की दिल की धड़कनें और तेज हो गईं। नर भेड़िया इस वक्त पेड़ के पास उसी शाख के नीचे था जिसमें आकाश बैठा था। आकाश ने अपने हाथों से मुँह दबा लिया था।

नर भेड़िया वहाँ से जाने वाला था लेकिन उसी वक्त आकाश के मुँह से हल्की आवाज निकल गयी क्योंकि उसके सामने एक बोंड़ा साँप था। बोंड़ा साँप, अजगर कुल के साँप की एक प्रजाति है जो गाँवों में गाय के बछड़ों को भी निगल जाती है।

कैरी, पम्मी, मनु और टेड्डी एक जगह थे। अब उनका मकसद जल्द से जल्द आकाश को खोजना था। पूरी जिम्मेदारी कैरी के ऊपर थी। उसी समय नर भेड़िये की एक जोरदार आवाज सुनकर कैरी के पीछे-पीछे सभी तालाब की ओर दौड़ने लगे। सबके हाथों में एक-एक बड़े और मजबूत डंडे थे, सिर्फ टेड्डी को छोड़कर।

तालाब के किनारे पहुँचने पर वहाँ का मंजर बहुत भयानक था। नर भेड़िया आकाश को पेड़ से नीचे खींच चुका था। उसने आकाश के हाथ की एक अंगुली अपने पैने दाँतों से काट लिया था। आकाश खून से तर-बतर था। सभी ने अपनी चिंता छोड़कर तेजी से नर भेड़िये की ओर डण्डे सहित छलाँग लगा दी। टेड्डी उछल कर उसके गले पर काटने लगी। उसी समय सभी ने नर भेड़िये के ऊपर डण्डों की बारिश कर दी। तभी अचानक मनु के बाएँ हाथ में एक चीज चमकी, यह एक तेज धार वाली बनारसी छुरी थी जिसे कुछ दिन पहले मनु ने इण्टरनेट से ऑनलाइन खरीदा था तथा यहाँ तक छुपा कर लाया था।

मनु ने जरा भी देर न करते हुए वह खंजर नर भेड़िये के सीने में घुसा दिया। वह भयानक जानवर बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ा। सभी ने सोंचा की वह मर गया और कुछ देर उसे घुरते हुए मुड़कर वापस जाने लगे। परन्तु यह उनकी भूल थी। नर भेड़िया बेहोसी से उठा और पीछे से दौड़कर कैरी के गर्दन पर काटने की कोशिश करने लगा। यह देखकर टेड्डी बदहवास हो गयी और उसने अन्तिम लड़ाई लड़ने के लिए एक जोरदार छलाँग मारी और अपने नुकीले पँजों से उस खूँखार नर भेड़िये के दोनों आँखों को फोड़ दिया। इसी खूनी लड़ाई में उस भेड़िये का एक नुकीली नाखून टेड्डी के शरीर में घुस गई। टेड्डी जोर से दर्दभरी आवाज के साथ जमीन में गिर कर छटपटाने लगी।

इस दौरान कैरी ने नर भेड़िये के सीने से खँजर को वापस खीँच कर और अपनी इंसानियत भुल कर उस धारदार खँजर से नर भेड़िये का सिर ही धड़ से अलग कर दिया।

चारों ओर एकदम सन्नाटा एकदम सन्नाटा था। सबकुछ बिल्कुल सामन्य हो गया सिवाय कैरी के आँखों के आँसू के जो रुक ही नहीं रहे थे। टेड्डी अब भी तड़प रही थी। सभी टेड्डी के चारों ओर सिर झुकाकर मासूम बैठे थे।

सुबह की पहली किरण निकल चुकी थी और किसी किसी नेक प्राणी के शरीर से उसकी जान निकल चुकी थी। यह घटना कैरी के बर्दाश्त से बाहर थी उसने उसी खँजर से नर भेड़िये के अनगिनत टुकड़े कर दिए। मनु और आकाश ने उसे रोका। कैरी ने बहुत रोने के बाद टेड्डी शरीर को उठाया और घर की ओर चले लगा।

घर जाते-जाते टेड्डी के बचपन से लेकर अभी तक की सुंदर यादें उसे और भी रुलाने लगी।

घर पहुँचकर उसने टेड्डी को आम की पेड़ के तने के पास जमीन के नीचे दफनाकर एक नया घर दे दिया। इस वक्त कैरी की माँ के आँखों से भी आँशु निकल रहे थे।

टेड्डी अपना कर्तब्य निभाकर सभी को छोड़ इस दुनिया से जा चुकी थी।

Originally Published On harishmanik.com

Written by Harish Manik

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