ग्रामीण क्षेत्रों व्यवसाय आर्थिक लाभ एवं हानि भाग 01:: किराना दुकान: क्या किराना दुकान करनी चाहिए?

परिचय: किराना दुकान


फ़ोटो: एक किराना दुकान

किराना दुकान में सामानों की सूची:
  • बिस्किट।
  • खाद्य तेल।
  • वेफर्स।
  • चॉकलेट।
  • चावल।
  • दाल।
  • चीनी, चायपत्ती।
  • पूजा की सामग्री।
  • नारियल।
  • पकवान बनाने के समान इत्यादि।
किराना दुकान ग्रामीण क्षेत्रों में अपनाई जाने वाली एक बहुपरिचित व्यवसाय है, प्रत्येक गाँव में हर 10 वें घर में देखी जा सकती है। यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण ग्रामीण व्यवसाय है जो ग्रामीण क्षेत्र के बेरोजगारों को प्रतिदिन आय प्रदान करती है। किराना दुकान ही वह जगह होती है जहाँ से लोगों को प्रितिदिन की राशन खरीदी में मिल जाती है।

किराना दुकान ग्गगग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में भी की जाती है, लेकिन यहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार से संबंधित विषयों की ही चर्चा की जा रही है।

इस पोस्ट के माध्यम से यह बताई जाएगी कि किराना दुकान करने के क्या-क्या फायदे या नुकसान हैं। अथवा, हमें किराना दुकान करनी चाहिए या नहीं?

कैसे काम करती है किराना दुकान?

इसे हम इस तरह के उदाहरण से समझने की कोशिश करते हैं- मान लेते हैं कि बसंत अपने घर में एक किराना दुकान खोलना चाहता है। इसके लिए उसके पास आवश्यक पूँजी है। वह शहर के किसी थोक बिक्री वाले दुकान से 30000 रुपये का सामान लाता है। अब वह प्रत्येक सामान की कीमत थोड़ी सी बढ़ाकर गाँव में बेंचता है। मान लीजिए उसे एक पारले जी बिस्किट की खरीदी में 4.50 रुपये खर्च करनी पड़ी, अब वह उसे 5 रुपये में बेंचता है, अतः उसके लाभ की मार्जिन 50 पैसे होंगे।

कितनी लगती है निवेश?

इन दुकानों की शुरुआत काफी छोटे से लेकर बड़े स्तर पर की जा सकती है। अतः निवेश के लिए ज्यादा चिंतन करने की जरूरत नहीं पड़ती। एक अच्छे खासे किनारा दुकान की शुरुआत 5000 रुपये से की जा सकती है। व्यवसायिक स्तर पर शुरूआत करने के लिए 25000 से लेकर 50000 रुपये का निवेश किया जा सकता है। हालाँकि बहुत ही निम्नतम स्तर पर शुरुआत करने के लिए 500 से 1000 रुपये से भी शुरुआत की जा सकती है, परन्तु यह एक इंसान के मेहनत पर निर्भर करती है।

पूँजी जमा करने के लिए परिवार, रिस्तेदारों, दोस्तों एवं पड़ोसियों से सहायता ली जा सकती है।

कितनी होती है आय?

आय कितनी होगी या कितनी हो सकती है, यह पूरी तरह दुकान मालिक के मेहनत पर निर्भर करती है। एक छोटे दुकान में दिनभर में 500 रुपये से 1000 रुपये की बिक्री हो सकती है, जिसमें 50 रुपये से 500 रुपये की लाभ हो जाती है। परन्तु थोक दुकानों में प्रतिदिन 5000 रुपये से 50000 रुपये की बिक्री हो जाती है, जिसमें 1000 रुपये से 10000 रुपये से ज्यादा लाभ हो जाती है।

किराना दुकान के प्रकार

किराना दुकान निम्न प्रकार के होते हैं:

  • थोक किराना दुकान।
  • चिल्हर किराना दुकान।
  • हाट एवं बाजारों में लगाई जाने वाली दुकान।
  • ठेलों में चलाई जाने वाली दुकान।

थोक किराना दुकान

थोक दुकानों को अधिकतर बड़े कस्बों या शहरों में देखी जा सकती है। यहाँ हर सामान बहुत अधिक मात्रा में होती है जिनका विक्रय थोक दर में किया जाता है। आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित दुकानों के मालिकों के द्वारा इन्ही थोक दुकानों से खरीदी की जाती है। थोक दुकानों के द्वारा खरीदी सीधे उत्पाद बनाने वाली छोटी फर्मों से की जाती है।

चिल्हर किराना दुकान

चिल्हर किराना दुकान ऐसे दुकान हैं जिनकी संख्या भारतवर्ष में सबसे अधिक है। इनकी 90 प्रतिशत से ज्यादा संख्या ग्रामीण क्षेत्रों में ही होती है। हालाँकि इनके मालिकों के द्वारा खरीदी थोक दुकानों से की जाती है, लेकिन कई बार इनके द्वारा खरीदी वाहनों में बेची जाने वाली सामानों से कर ली जाती है। इनके ग्राहक सम्पूर्ण ग्रामवासी होते हैं।

हाट एवं बाजारों में लगाई जाने वाली दुकान

कई बार किराना दुकान के मालिक हाट एवं बाजारों में जाकर भी बिक्री का काम करते हैं। इनमें से अधिकतर सिर्फ साप्ताहिक बाजारों में ही बिक्री का काम करते हैं। इनके ग्राहक तय होते हैं। बाजारों विक्रय करने के बाद ये गाँव में भी थोड़ी बहुत बिक्री कर लेते हैं। इनके पास सामान एक निश्चित मात्रा में होती है।

ठेलों में चलाई जाने वाली दुकान

ठेलों में चलाई जाने वाली दुकान सबसे छोटी दुकान होती है। ऐसे दुकान बसस्टैण्ड, चौराहों तथा सेंटर जगहों में होते हैं। इनके मुख्य ग्राहक दिनभर आने जाने वाले बाहरी क्षेत्र के ग्रामीण या शहरवासी होते हैं।

क्यों करनी चाहिए किराना दुकान की व्यवसाय?: सकारात्मक पहलू एवं लाभ

आज वर्तमान समय में बेरोजगारी की समस्या बहुत अधिक है। पढ़े लिखे लोग अक्सर सरकारी नौकरी पाने की तलाश में निजी नौकरी भी करना पसंद नहीं करते। कई बार तो बेरोजगारी की समस्या ऐसी होती है कि लोग अपने गाँव, शहर और राज्य को छोड़कर दूसरे राज्य या अन्य देश में रोजगार की तलाश में चले जाते हैं। वहीं कम पढ़े लिखे लोग जिन्हें कहीं नौकरी मिलने की संभावना नहीं होती उनके लिए किराना दुकान व्यवसाय की एक अच्छी अवसर है।

सकारात्मक पहलू एवं लाभ इस प्रकार हैं:

  • घर से ही वयवसाय: इस व्यवसाय का प्रारंभ अपने घर के एक छोटे से कमरे से ही किया जा सकता है। इसके लिए अलग से किराये पर रूम लेने की आवश्यकता नहीं पड़ती है
  • कम निवेश में व्यवसाय का प्रारंभ होना: चूँकि निवेश कम रुपयों की ही होती है अतः रुपयों के व्यवस्था में ज्यादा समस्या नहीं आती है।
  • स्वरोजगार का अच्छा साधन: स्वरोजगार के कई लीगल तरीके होते हैं। परन्तु उनमें कोई न कोई समस्या होती है जिसे हल करना थोड़ा कठिन होता है। क्योंकि इस व्यवसाय की देखरेख परिवार के सभी सदस्यों द्वारा किया जा सकता है, अतः पूरे परिवार के रोजगार की यह एक अच्छी साधन है।
  • कम ज्ञान के साथ व्यवसाय: हर व्यवसाय में कुछ न कुछ ज्ञान की जरूरत होती है। व्यवसाय के बड़े होने से ज्ञान और अनुभव की भी ज्यादा जरूरत होती है, परन्तु किराना दुकान को बड़े स्तर पर कम ज्ञान के साथ और लगन के साथ किया जा सकता है।
  • मजदूर का रखना न रखना खुद पर निर्भर करता है।
  • 1 नौकर से काम होना: छोटे दुकानों में तो नौकर रखने की जरूरत ही नहीं होती है।

क्यों नहीं करनी चाहिए किराना दुकान की व्यवसाय?: नकारात्मक पहलू एवं लाभ

नकारात्मक पहलू एवं लाभ इस प्रकार से हैं:
  • प्रतिस्पर्धा का होना: पूर्व में बताए अनुसार इस व्यसाय में प्रतिस्पर्धा बहुत अधिक होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में हर मोहल्ले में औसतन 2 दुकान मिल ही जाते हैं। इस तरह प्रति दुकान ग्राहकों की संख्या कम हो जाती है।
  • लाभ का मार्जिन कम होना: किराना दुकान में बेंचे जाने वाले सामानों में लाभ का मार्जिन कम ही होता है। इसका सीधा प्रभाव छोटे दुकान के मालिकों पर देखी जा सकती है। थोक दुकानों पर इसका ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता है।
  • बिना लगन और मेहनत के साथ यह व्यवसाय लाभ के बजाय हानिकारक होती है।

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